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कविता: घर या होटल

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🏵️ कविता : घर या होटल 🏵️ आजकल की भागती सड़कों पर, रिश्ते कहीं कोनों में सिसक रहे हैं, संस्कार धूल में दबे पड़े हैं, और घर—बस एक होटल-सा दिख रहा है। न माँ की रसोई की सुगंध है, न पिता के आँचल की छाँव, अब तो गैजेट्स की खनक सुनाई देती है, जहाँ पहले गूँजती थी आरती की ध्वनि। दहलीज़, जो कभी आशीर्वादों से पवित्र थी, अब बस जूतों की खटखट से भरी है, कमरे—गेस्ट रूम जैसे, जहाँ हर कोई आता है, ठहरता है, और चला जाता है। भाई-बहन की नोकझोंक खो गई, दादी की कहानियाँ किताबों में सो गईं, टीवी के शोर में गीत नहीं मिलते, हर आत्मा अब अकेलेपन का गीत गुनगुनाती है। घर की परिभाषा बदल गई— अब यहाँ प्यार का नहीं, बल्कि "कब आना है, कब जाना है" का हिसाब रखा जाता है। कभी घर आत्मा का मंदिर था, अब बस होटल का कमरा है— जहाँ दिल चेक-इन तो करता है, मगर अपनापन… चेक-आउट हो जाता है। डीबी-आर्यमौलिक

कविता में रामायण

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रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, कर्तव्य का बोध और नैतिकता का आधार भी है। यही कारण है कि रामायण और रामजी मुझे प्रेरित करते हैं. रामायण में हैं आदर्श जीवन की शिक्षा राम हमें सिखाते हैं कि कठिनाइयों और अन्याय के बीच भी धर्म और कर्तव्य से विचलित नहीं होना चाहिए, सीता त्याग, धैर्य और स्त्री-शक्ति की प्रतीक हैं, लक्ष्मण भाईचारे और सेवा-भाव के उदाहरण हैं, हनुमान भक्ति और निःस्वार्थ समर्पण के प्रतीक हैं. हमारे जीवन के कर्तव्य क्या हैं ये उसका बोध कराती हैं. रामायण दिखाती है कि व्यक्ति को अपने निजी सुख-दुख से ऊपर उठकर परिवार, समाज और धर्म के प्रति उत्तरदायित्व निभाना चाहिए। 🙏 राम ने राजसिंहासन छोड़कर पिता के वचन की रक्षा की। 🙏लक्ष्मण ने भाई के साथ 14 साल का वनवास निभाया। मानवीय जीवन में धर्म और अधर्म का संघर्ष राम और रावण का युद्ध केवल दो राजाओं की लड़ाई नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म की टक्कर है। यह हमें याद दिलाता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में विजय सत्य और धर्म की ही होती है। 🙏 संघर्ष में धैर्य और साहस वनवास, कठिनाइयाँ, युद्ध –...

मजनू की मोहब्बत पार्ट -2

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मजनू भोपाली का इश्क़नामा, भाग- 2 अगली ही शाम फिर वही टपरी, वही गिलास, वही भाप उड़ाती चाय। पर इस बार भीड़ कुछ ज़्यादा थी। मोहल्ले में खबर फैल चुकी थी कि मजनू भाई ने कल इश्क़ पर लेक्चर दिया। अब सबको इंतज़ार था आज के नए खुलासे का। मैं पहले ही पहुँच गया था। तभी मजनू भाई आते दिखे—कंधे पर झोला, आँखों में वही पुराना इश्क़, और होंठों पर नयी शायरी। मैं:-“मजनू भाई, कल आपने जो एकतरफा इश्क़ का राज़ खोला था, उससे मोहल्ला अब तक उबर नहीं पाया है। लेकिन एक सवाल सबके मन में है—आपकी शादी हो चुकी है न? तो ये इश्क़ उसके बाद कैसे?” मजनू भाई: (हँसते हुए):- "अरे भाई, शादी और इश्क़ में फर्क है। शादी घर का राशन है—नून-तेल-आटा। और इश्क़ होटल का खाना है—न मसाला कम, न टेस्ट फीका। शादी जीने की मजबूरी है, इश्क़ जीने की मस्ती।” इसी बात पर अर्ज हैं -- "शादी से मिलता है पेट का सुकून, मोहब्बत से मिलता है दिल का जुनून।” टपरी पर बैठे सभी शादीशुदा मर्दों ने सिर झुका लिया, बाकी लड़के ठहाके लगाने लगे।  तभी एक लड़का मजनू के करीब आया 1 लड़का :- "अंकल, मेरी गर्लफ्रेंड मुझसे हर बार यही कहती हैं कि तुम ...

❤️❤️मजनू की मोहब्बत❤️❤️

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❤️❤️मजनू की मोहब्बत❤️❤️ ❤️ मजनू भोपाली का इश्क़नामा – भाग 1 टपरी की महफ़िल शाम ढल चुकी थी। कॉलोनी के मोड़ पर बनी उस पुरानी चाय की टपरी से भाप उड़ाती हुई केतली, छनते हुए छनकती चाय की खुशबू और खटाखट होती गिलासों की आवाज़ें पूरे सबका दिल बहला रही थीं। मैं रोज़ की तरह अपनी जगह पर आकर बैठा ही था कि सामने से आते दिखे—मजनू भोपाली। 55 साल की उमर, सफ़ेद बालों की दाढ़ी, आँखों में हमेशा चमक और चेहरे पर वो “आशिक़ाना मुस्कान” जो मोहल्ले की आधी औरतों को खटकती और आधे लड़कों को प्रेरित करती थी। उनका आना मतलब टपरी की शाम में हलचल। हर कोई जानता था—अब चाय सिर्फ पीने की चीज़ नहीं, बल्कि "महफ़िल" जमने वाली है। मैं:-“मजनू भाई, पिछले कुछ दिनों से आपको देख रहा हूँ... चेहरे पर नयी चमक है, आँखों में नयी नमी है। मोहल्ले वाले कह रहे हैं कि आप फिर से किसी 'एकतरफा इश्क़' में पड़ गए हो। सच बताइए, कौन है वो मोहतरमा?” मजनू भाई: (गहरी चुस्की लेते हुए)- "अरे भाई, इश्क़ तो वो रोग है जिसमें डॉक्टर भी फेल हो जाता हैं। और फिर मैं तो इस रोग का पुराना मरीज हूँ। देखो, मोहब्बत पूछकर नहीं की जा...

अध्याय-1 आचार और व्यवहार

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अध्याय-1 आचार और व्यवहार  आचार और व्यवहार : व्यक्तित्व की असली पहचान मनुष्य के जीवन में आचार (Conduct) और व्यवहार (Behavior) वही स्थान रखते हैं जो शरीर में आत्मा का होता है। यह दोनों ही किसी व्यक्ति की पहचान, उसके संस्कार और उसके सामाजिक मूल्य का आधार होते हैं। धन, पद या शोहरत कितनी भी बड़ी क्यों न हो, यदि आचार और व्यवहार शुद्ध न हों तो वह व्यक्ति समाज में सम्मान का पात्र नहीं बन सकता। इसी कारण भारतीय संस्कृति में आचार-विचार और सद्व्यवहार को चरित्र की नींव माना गया है। 1. आचार का अर्थ और महत्व आचार का अर्थ है – जीवन जीने की वह नैतिक और आचरण संबंधी रीति, जो शुद्ध, संयमित और मर्यादित हो। यह वह नियम है जिसके आधार पर व्यक्ति स्वयं को नियंत्रित करता है। आचार हमें सिखाता है कि क्या करना उचित है और क्या अनुचित। यह भीतर की पवित्रता और आत्मानुशासन का प्रतीक है। जैसे – सत्य बोलना, वचन का पालन करना, समय पर कार्य करना, स्वच्छता रखना और किसी का अनादर न करना अच्छे आचार कहलाते हैं। अगर आचार गलत हो तो व्यक्ति की प्रतिभा, ज्ञान और शक्ति भी व्यर्थ हो जाती है। इतिहास साक्षी है कि जिन व्यक...

चाणक्य नीति

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चाणक्य नीति प्रस्तावना- अध्याय 1 – आचार और व्यवहार इसमें अच्छे आचरण, सत्य, संयम और विवेक के महत्व पर बल दिया गया है। बुरे संग और आलस्य से बचकर, ज्ञान व सदाचार अपनाने की प्रेरणा दी गई है। अध्याय 2 – मित्र और शत्रु की पहचान सच्चे मित्र और छुपे हुए शत्रु को पहचानने के संकेत बताए गए हैं। योग्य गुरु, विनम्र व्यवहार और सज्जनों की संगति का महत्व समझाया गया है। अध्याय 3 – धन, ज्ञान और यश धन, विद्या, यश और धर्म के बीच संतुलन का संदेश। व्यर्थ खर्च, झूठे दिखावे और लोभ से बचने की सीख। अध्याय 4 – जीवन में सावधानी जीवन के संकट, विपत्तियों और अवसरों को समझदारी से संभालने के उपाय। काम, क्रोध और अहंकार से बचने की सलाह। अध्याय 5 – समय और परिस्थिति समय, स्थान और परिस्थिति का सही मूल्यांकन करने की आवश्यकता। आलस्य, असावधानी और अनुचित समय पर काम करने से हानि बताई गई है। अध्याय 6 – परिवार और समाज परिवार में अनुशासन, संस्कार और आपसी सद्भाव का महत्व। योग्य संतान, धर्मपत्नी और अच्छे पड़ोस के लाभ बताए गए हैं। अध्याय 7 – नीति और धर्म धर्म, नीति, सदाचार और कर्तव्य के बीच संतुलन कैसे हो, इस पर मार्गदर्श...

नेता, अमरता और खबर

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"नेता, अमरता और खबर" पुरानी चाय की दुकान। बाहर टूटी-फूटी लकड़ी की बेंच, ऊपर धूल भरा पंखा। चाय वाले के रेडियो पर धीमी आवाज़ में खबरें चल रही हैं – “माननीय नेता जी ने कहा, यह फैसला ऐतिहासिक है…” मैं और मजनू भोपाली कुल्हड़ चाय लेकर बैठे हैं। सामने ताश खेलने वाले चार पियक्कड़ और बगल में पान की पीक से सजी दीवार। राजनीति पर चर्चा का यही सही मंच है। मैं: मजनू मियां, आजकल अख़बार पलटकर देखो तो हर जगह सिर्फ नेताओं के ही चेहरे। मुझे तो ऐसा लगता है जैसे ये लोग भगवान से भी ज्यादा नेता “अमर” हो रहें हैं। मजनू: भाई साहब, आपने बिल्कुल सही पकड़ा। ये राजनीति कोई धर्म से कम नहीं। फर्क बस इतना है कि यहाँ पूजा वोट की होती है और प्रसाद कुर्सी का मिलता है। और रही बात “अमरता” की, तो अब वो अमरता गीता या कुरान को पढ़ने से नहीं मिलती, पोस्टर, बैनर और न्यूज चैनलों की बहस से मिलती है। मैं: सही कहा। इसलिए तो लोग कहते हैं – “जो नेता बना वो अमर हो गया, जो अमर न हुआ वो खबर हो गया।” मजनू (हँसते हुए): बिल्कुल! राजनीति में या तो आप कुर्सी पर बैठे रहो और इतिहास का हिस्सा बनो, या फिर चुनाव हारकर अख़बार...

ह (हिंदी) और E (इंग्लिश) की दलील व्यंग

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"ह" बनाम "E" : अदालत में दलील व्यंग  दिन भर की थकान शाम को मोहल्ले की नुक्कड़ पर चाय की टपरी पर ही मिटती हैं ये आम आदमी की फितरत में शुमार हैं....न्यूज़ चेंनल से आते ही यहां जरूर आता हूं घंटा दो घण्टा बिताने के उसके बाद घर की तरफ कूच करता हूं... मैं और मजनू भोपाली बेंच पर बैठे थे सामने उबलती केतली, पीछे लटकता हुआ नोटिस जिस पर लिखा था  "हमारे यहाँ समोसे गर्म गर्म मिलते हैं ” मैंने मजनू की तरफ देखा तो मजनू मियां भी मुस्कुरा दिये क्योंकि कल यही नोटिस इंग्लिश में लिखा था मैंने मजनू के कंधे पर हाथ रखते हूं कहा- मजनू भाई, एक बात बताइए… ये कैसी विडंबना है कि भारत में पैदा हुए लोग ही हिंदी को "गँवारों की भाषा" बताकर अंग्रेज़ी के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे बाबूजी की डांट से बचता बच्चा। मजनू भोपाली –(कड़क चाय की चुस्की लेते हुए)- भाईजान, ये सब "राष्ट्रभाषा" का मामला कम और "राशनकार्ड" का मामला ज़्यादा है। अंग्रेज़ी बोलने से इंटरव्यू में नौकरी मिल जाती है, हिंदी बोलने पर सिर्फ़ "नौकरी की तलाश" मिलती है। आजकल तो हाल ये है कि ह...