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माइग्रेन

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*माइग्रेन के रोगियों के लिये बहुत काम की है यह जानकारी* माइग्रेन का दर्द सूरज उगने के साथ शुरू होकर दोपहर तक बढ़ता है और दोपहर के बाद घटना शुरू हो जाता है । इस रोग में चार से बारह घण्टे तक सिर में असहनीय पीड़ा होती है । इस लेख के माध्यम से हम माइग्रेन के रोग के समाधान के लिये कुछ उपयोगी जानकारी आपको दे रहे हैं, पाँच मिनट का समय निकालकर जरूर पढ़ियेगा । कम सोना, थकान रहना, समय से भोजन ना करना, लम्बे समय तक भूखे रहने, ज्यादा तनाव में रहने से, और रात को ज्यादा देर तक जागते रहने से यह रोग हो जाया करता है । ज्यादा ठण्डी चीजों के सेवन से और ठण्डी जगहों पर ज्यादा देर तक ठहरने से भी इस रोग की सम्भावनायें बढ़ जाती हैं । अमूमन दर्द शुरू होने से पहले ही रोगी को इसके संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं । आँखों के सामने काला धब्बा और धुँधलापन सा छाने लगता है । कभी कभी तेज रोशनी की भी अनुभूति होती है । रोगी को हाथ पैर में झुनझुनाहट और सुन्नता महसूस होती है । मानसिक रूप से रोगी खिन्न सा रहता है और चिड़चिड़ा स्वभाव हो जाता है । आगे बात करते हैं इस रोग के समाधान के लिये कुछ कारगर उपायों की । मल-मूत्र, गै...

कर्ज मुक्ति के सिद्ध वैदिक उपाय

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कर्ज से मुक्ति के सिद्ध वैदिक उपाय     कर्ज या ऋ़ण का होना जिंदगी को मुश्किल में डाल देता है। कर्ज मुक्त जीवन ही सबसे खुशहाल जीवन होता है। कई बार कर्ज लेने के बाद उसे लौटाना व्यक्ति को भारी पड़ता है और उसकी पूरी जिंदगी कर्ज चुकाते-चुकाते खत्म हो जाती है। कर्ज मुक्ति हेतु आइए जानें कुछ सरल और कुछ कठिन, लेकिन अचूक उपाय। ऋ‍ण उतारने के लिए नारियल करे अर्पित –  एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। कुछ भोग (लड्डू अथवा गुड़-चना) के साथ हनुमानजी के मंदिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। आप हर रोज लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार के दिन शिवलिंग पर मसूर की दाल और जल अर्पित करें। इसके बाद ओम ऋण मुक्तेश्वर महादेवाय नम: का जाप करें। इससे आपको कर्ज और लोन से धीरे-धीरे मुक्ति मिल जाएगी। तत्काल लाभ प्राप्त होगा।दूसरा उपाय शनिवार के दिन सुबह नित्य कर्म व स्नान आदि करने के बाद अपनी लंबाई के अनुसार काला धागा लें और इसे एक नारियल पर लपेट लें। इसका पूजन करें और उसको नदी के बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।...

मित्र ग्रह

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आपका मित्र ग्रह कौन है? हर कुंडली में कोई न कोई ग्रह सबसे अधिक प्रभावशाली होता है। यह ग्रह व्यक्ति की पर्सनैलिटी, स्वभाव और सोच पर गहरा असर डालता है। ब्लॉग में दिए गए लक्षणों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपकी कुंडली में कौन-सा ग्रह मित्रवत प्रभाव डाल रहा है। 1. सूर्य: सूर्य बलवान हो, तो व्यक्ति आत्मविश्वासी, नेतृत्वकारी और सबकी चिंता करने वाला होता है। स्वभाव में "मैं हूं ना, चिंता मत करो" जैसी भावना होती है। सामाजिक कार्यों में सबसे आगे रहते हैं। 2. चंद्र: चंद्रमा बलवान हो, तो व्यक्ति भावुक, आनंदप्रिय और दूसरों से जल्दी घुलने-मिलने वाला होता है। वह दूसरों के अच्छे गुणों को तुरंत अपनाने की कला जानता है। 3. मंगल: बलवान मंगल व्यक्ति को शारीरिक रूप से मजबूत, साहसी और जोशीला बनाता है। ऐसा इंसान मेहनत की कद्र करता है और सबको प्रेरित करता है कि "मेहनत से सब मुमकिन है।" 4. बुध: बुध बलवान हो, तो व्यक्ति बुद्धिमान, हास्यप्रिय और मल्टीटैलेंटेड होता है। ऐसा इंसान हमेशा ऐसा माहौल बनाता है जो सबके चेहरे पर मुस्कान ले आए। 5. गुरु (बृहस्पति): गुरु का प्रभाव ज्ञान, धर्म...

कुंडली में धन योग

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कुंडली में धन योग। कुंडली में धन योग का मतलब है ऐसा योग या संयोजन जो जातक को धन, समृद्धि और भौतिक सुख-सुविधाएँ प्रदान करता है। वैदिक ज्योतिष में कई प्रकार के धन योग बताए गए हैं, जो विभिन्न ग्रहों और भावों के संयोजन से उत्पन्न होते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख धन योगों का वर्णन किया गया है: 1. धन योग: यदि कुंडली में द्वितीय भाव (धन भाव) या ग्यारहवें भाव (लाभ भाव) का स्वामी केन्द्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) में स्थित हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट हो, तो यह धन योग बनाता है। लग्नेश का लाभेश या धनेश के साथ संबंध भी धन योग का निर्माण करता है। 2. लक्ष्मी योग: यदि कुंडली में नवम भाव (भाग्य भाव) का स्वामी केन्द्र में हो और यह स्वयं बलवान हो, तो लक्ष्मी योग बनता है। इस योग से व्यक्ति को धन, संपत्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। 3. धन धान्य योग: यदि द्वितीय और ग्यारहवें भाव का स्वामी परस्पर केंद्र या त्रिकोण में हो और शुभ ग्रहों के प्रभाव में हो, तो यह योग अत्यधिक धन की प्राप्ति कराता है। 4. चन्द्र-मंगल योग (लक्ष्मी नारायण योग): यदि चन्द्रमा और मंगल का योग केंद्र या त्रिकोण में हो, तो ...

सावर वशीकरण

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सावर वशीकर-01 “आगिशनी माल खानदानी। इन्नी अम्मा, हव्वा यूसुफ जुलैखानी। ‘फलानी’ मुझ पै हो दीवानी। बरहक अब्दुल कादर जीलानी।” विधिः- पूरा प्रयोग २१ दिन का है, किन्तु ११ दिन में ही इसका प्रभाव दिखाई देने लगता है। इस प्रयोग का दुरुपयोग कदापि नहीं करना चाहिए, अन्यथा स्वयं को भी हानि हो सकती है। साधना-काल में मांस, मछली, लहसुन, प्याज, दूध, दही, घी आदि वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहन कर साधना करनी चाहिए। पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लम्बी धोती या स्वच्छ वस्त्र को ‘अहराना’ की तरह बाँध कर साधना करनी चाहिए। शेष बची हुई धोती या कपड़े को शरीर पर लपेटते हुए सिर को ढँक लेना चाहिए। एक ही कपड़े से पूरा शरीर ढँकना चाहिए, जैसे हिन्दू-स्त्रियाँ पहनती है। उक्त मन्त्र की साधना रात्रि में, जब ‘नमाज’ आदि का समय समाप्त हो जाता है, तब करनी चाहिए। साधना करने से पहले मुसलमानी विधि से वजू करे। हो सके, तो नहा ले। जप या तो हिन्दू-विधि से करे या मुसलमानी विधि से। हिन्दू-विधि में माला का दाने अपनी तरफ घुमाए जाते हैं। मुसलमानी विधि में माला के दाने अपनी तरफ से आगे की ओर...

हनुमान बाहुक

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हनुमान बाहुक पाठ हिंदी में अर्थ सहित हनुमान बाहुक पाठ को लोग हनुमान बाहुक चालीसा, श्री हनुमान बाहुक, हनुमान बाहुक मंत्र, श्री हनुमान बाहुक पाठ, बजरंग बाहुक पाठ के नाम से बी जानते हे। संवत् 1664 विक्रमाब्द के लगभग गोस्वामी तुलसीदासजी की बाहुओं में वात-व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी और फोड़े-फुंसियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान – सा बन गया था। औषध, यन्त्र, मन्त्र, त्रोटक आदि अनेक उपाय किये गये, किन्तु घटने के बदले रोग दिनोंदिन बढ़ता ही जाता था। असहनीय कष्टों से हताश होकर अन्त में उसकी निवृत्ति के लिये गोस्वामी तुलसीदासजी ने हनुमान् जी की वन्दना आरम्भ की। अंजनीकुमार की कृपा से उनकी सारी व्यथा नष्ट हो गयी। यह वही 44 पद्यों का ‘हनुमानबाहुक’ नामक प्रसिद्ध स्तोत्र है। असंख्य हरिभक्त श्रीहनुमान् जी के उपासक निरन्तर इसका पाठ करते हैं और अपने वांछित मनोरथ को प्राप्त करके प्रसन्न होते हैं। संकट के समय इस सद्यः फलदायक स्तोत्र का श्रद्धा-विश्वासपूर्वक पाठ करना रामभक्तों के लिये परमानन्ददायक सिद्ध हुआ है। आशा है रामानुरागी सज्जनों को बाहुक के पद्यों का भावार्थ समझने में इससे बह...