दूर करें दुर्भाग्य
दूर करें दुर्भाग्य दुर्भाग्य अर्थात जीवन में आने वाला ऐसा समय जब मनुष्य के प्रयासों के बावजूद उसे सफलता नहीं मिलती। यह समय मन को हताश करता है, परंतु यही समय आत्ममंथन और आत्मबल को जागृत करने का अवसर भी होता है। दुर्भाग्य किसी भी व्यक्ति के जीवन का स्थायी सत्य नहीं होता। यह काल ग्रहों की स्थिति, कर्मों के फल और मनुष्य के दृष्टिकोण पर भी निर्भर करता है। प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है – "न हि दुर्भाग्यमस्ति पुरुषस्य प्रयासवत:" अर्थात कोई मनुष्य दुर्भाग्यशाली नहीं होता, यदि वह प्रयत्नशील हो। दुर्भाग्य के समय में कई लोग ईश्वर पर दोष देते हैं, जबकि यह समय साधना, संयम और धैर्य का होता है। यह हमारे जीवन का ऐसा पड़ाव है, जहाँ हम अपने अंदर छिपी हुई शक्ति को पहचान सकते हैं। समाधान: दुर्भाग्य को दूर करने के लिए कर्मशील बनना, सत्संग करना, ईश्वर का स्मरण करना और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से शांति उपाय अपनाना आवश्यक है। जैसे – दान-पुण्य करना मंत्र जाप (जैसे "ॐ नमः शिवाय") ग्रह शांति यज्ञ गौ सेवा दुर्भाग्य कोई शाप नहीं, बल्कि जीवन की परीक्षा है। इसे धैर्य, श्रद्धा और साहस से...