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प्रेत योग

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प्रेत श्राप योग जिंदगी को हर तरह से तहस-नहस और बर्बाद कर देता है !  'प्रेत श्राप योग।' कहते हैं कि, जिस भी जातक की जन्म पत्रिका में शनि-राहु या शनि-केतु की युति होती है तो, इस युति को प्रेत शाप योग कहते हैं।  दूसरा यह कि, राहु अथवा केतु का चतुर्थ या दूसरे (कुटुम्ब स्थान) से संबंध होने पर या लग्न के अंश के समीप होने पर भी ये योग बनता है, यह योग या तो स्थायी होता है या फिर अस्थायी। गोचर और अंतरदशा अंतर्गत भी ये योग बनता है।    जहां तक सवाल शनि-राहु या शनि-केतु की युति से बनने वाले योग की बात है तो, यह युति जिस भी भाव में होती है, यह उस भाव के फल को बिगाड़ देती है या नष्ट कर देती है। ऐसे में व्यक्ति को हर कदम पर संघर्ष करना होता है और उसके जीवन में अचानक ही कोई घटना घट जाती है। ऐसी घटना जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता या अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता,  इस योग के कारण एक के बाद एक कमरे तोड़ कठिनाइयां सामने खड़ी होने लगती हैं।     यदि शनि या राहू में से किसी भी ग्रह की दशा चल रही हो या आयुकाल चल रहा हो यानी उम्र के 7 से 12 या 36 से लेकर 47 वर...

कुंडली में कर्ज के योग

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आज के दौर में कर्ज आधी से ज्यादा आबादी की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन गई है। नई कार, नया घर खरीदना, बच्चों के शैक्षणिक कार्य आदि चीजों के लिए कई बार कर्ज लेने की स्थिति बन जाती है। लेकिन कई बार ऐसी भी स्थिति बन जाती है कि कर्ज का समय पर भुगतान नहीं कर पाते हैं। वहीं महंगाई के इस दौर में आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया हो गया है, जिसकी वजह से कर्ज में रखी गिरवी चीजों को खोना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कई बार कुंडली में ऐसी स्थिति बन जाती है, जिनकी वजह से कर्ज लेना पड़ता है और कर्ज चुकाने में भी समस्या का सामना करना पड़ता है।  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, छठवें, आठवें, बारहवें और मंगल को कर्ज का कारक ग्रह माना जाता है। कुंडली में मंगल ग्रह के कमजोर होने पर और मंगल के पाप ग्रह से जुड़ने पर या छठवें, आठवें और बारहवें में नीच स्थिति में होने पर यानी मंगल अगर कर्क राशि में हैं तो व्यक्ति ज्यादातर समय कर्ज में रहता है। अगर मंगल पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़े तो कर्ज होता है लेकिन मुश्किल से उतरता है। शास्त्रों में मंगलवार और बुधवार के दिन कर्ज के लेन देन को वर्जित बताया गय...