प्रेत योग
प्रेत श्राप योग जिंदगी को हर तरह से तहस-नहस और बर्बाद कर देता है ! 'प्रेत श्राप योग।' कहते हैं कि, जिस भी जातक की जन्म पत्रिका में शनि-राहु या शनि-केतु की युति होती है तो, इस युति को प्रेत शाप योग कहते हैं। दूसरा यह कि, राहु अथवा केतु का चतुर्थ या दूसरे (कुटुम्ब स्थान) से संबंध होने पर या लग्न के अंश के समीप होने पर भी ये योग बनता है, यह योग या तो स्थायी होता है या फिर अस्थायी। गोचर और अंतरदशा अंतर्गत भी ये योग बनता है। जहां तक सवाल शनि-राहु या शनि-केतु की युति से बनने वाले योग की बात है तो, यह युति जिस भी भाव में होती है, यह उस भाव के फल को बिगाड़ देती है या नष्ट कर देती है। ऐसे में व्यक्ति को हर कदम पर संघर्ष करना होता है और उसके जीवन में अचानक ही कोई घटना घट जाती है। ऐसी घटना जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता या अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता, इस योग के कारण एक के बाद एक कमरे तोड़ कठिनाइयां सामने खड़ी होने लगती हैं। यदि शनि या राहू में से किसी भी ग्रह की दशा चल रही हो या आयुकाल चल रहा हो यानी उम्र के 7 से 12 या 36 से लेकर 47 वर...